यह प्रसिद्ध उपन्यासकार-कहानीकार आचार्य चतुरसेन का सर्वाधिक प्रसिद्ध उपन्यास है जिसकी कथावस्तु रामकथा पर आधारित है किंतु इसका मुख्य पात्र राम नहीं रावण है। इसमें रावण के चरित्र के अन्य पक्ष को रेखांकित करते हुए उसको राम से श्रेष्ठ बताया गया है। पुस्तक के अनुसार रावण ने दक्षिण को उत्तर से जोड़ने के लिए नई संस्कृति का प्रचार किया जिसे उसने रक्ष-संस्कृति का नाम दिया। रावण जब भगवान शिव की शरण में गया तो उसने इसे कुछ इस तरह से बताया “हम रक्षा करते हैं। यही हमारी रक्षसंस्कृति है|
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