बीसवीं सदी के सर्वाधिक प्रसिद्ध दार्शनिक थे बर्ट्रंड रसल। सन 1872 में जन्मे रसल ने वर्तमान समय की नब्ज़ को टटोला गहरा चिंतन-मनन किया सभी जटिल समस्याओं पर उनकी प्रखर मेधा की पकड़ ने उन्हें महान विचारक बनाया।नैतिक सामाजिक राजनैतिक और अंतरराष्ट्रीयता के व्यावहारिक सिद्धांतों के अतिरिक्त रसल ने जीवन और जगत के अन्य पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। वे मानव जीवन में प्रेम और सौंदर्य के प्रबल पक्षधर थे। उनके अनुसार इसी से आनंद की धारा बहती है और संपूर्ण मानव जाति की रक्षा संभव है।मिथ्या आदर्श उन्हें कभी पसंद नहीं आए। सत्य और यथार्थ उनकी पूँजी थे। न वे स्वयं किसी भ्रम में रहे न उनके दर्शन में ही ऐसा कुछ था। वे तो मानव-कल्याण के कुशल दार्शनिक थे।इस पुस्तक में इसी युग द्रष्टा का जीवन परिचय और सरल-सुबोध भाषा में उनके दर्शन को प्रस्तुत किया गया है।
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